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171 सदस्यों के खिलाफत के बाद भी पद पर जमे हुये हैं, पदाधिकारी

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आर्य की नादिरशाही से परिवहन संघ में दो फाड़ : 171 सदस्यों के खिलाफत के बाद भी पद पर जमे हुये हैं, पदाधिकारी

Aaj Ki Dahaad News

Sun, Jul 12, 2026

नारायणपुर- मालक परिवहन संघ में वर्तमान पदाधिकारियों की कार्यशैली से नाराज सदस्यों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मिली जानकारी के अनुसार संघ के सदस्यों ने पिछले दिनों पदाधिकारियों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था,जिसमें दो-तिहाई से अधिक सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। साथ ही संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में भी अधिकतर सदस्यों ने चुनाव के माध्यम से नई कार्यकारिणी चुने जाने की मांग रखी है। इसके बाद भी वर्तमान पदाधिकारी अपने पद से हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में सदस्यों की मांग है, कि नैतिकता के आधार पर पदाधिकारियों को अपने पद से हट जाना चाहिए। सोचनीय तथ्य है,कि जन समर्थन खोने के बाद भी पदाधिकारी उन्हीं सदस्यों का हित करने के लिए पद पर बने रहना चाहते हैं,जिन्होंने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में उनकी जनसेवा वाली भावना के भीतर से आर्थिक लाभ की बू आना लाजमी है।

अभिशापित है,अध्यक्ष-सचिव की कुर्सी

मालक परिवहन संघ में अध्यक्ष- सचिव की कुर्सी प्रारंभ से लेकर अब तक अभिशापित ही नजर आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार इस संघ में अब तक कोई भी पदाधिकारी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। आमदई खदान में खनन कार्य प्रारंभ होने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष राजेश दीवान ने कार्यकाल पूर्ण होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया, इसके बाद रतन दुबे अध्यक्ष बने,लेकिन कुछ ही महीने बाद नक्सलियों ने उनकी हत्या कर दी। इसी कड़ी में अशोक कर्मकार ने भी महज कुछ ही दिन अध्यक्ष रहने के बाद व्यक्तिगत कार्यों का हवाला देकर इस्तीफा सौंप दिया, इसके बाद वर्ष 2024 में तत्कालीन सचिव विक्रम बैस की हत्या हो गई। इसके बाद रिक्त हुये सचिव पद पर रुपेश देवांगन निर्वाचित होकर आये, लेकिन संघ के अध्यक्ष से मतभेद के चलते उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें हटा दिया गया। वर्तमान में अध्यक्ष पद संभाल रहे किशोर आर्य से संघ के सदस्यों को काफी उम्मीदें थी, लेकिन उनकी कार्यकारिणी संघ के इतिहास में अब तक की सबसे कमजोर कार्यकारिणी आँकी गई। उनकी कार्यशैली से संघ के 171 असंतुष्ट सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद भी किशोर आर्य अपनी कार्यकारिणी के साथ जबरदस्ती कुर्सी से चिपके नजर आ रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उनका भी कार्यकाल बहुत जल्द समाप्ती की ओर अग्रसर दिखाई दे रहा है,लेकिन सत्ताधारी नेताओं से नजदीकी का लाभ उठाकर या अन्य किसी दबाव के बलबूते अगर वो अपना कार्यकाल पूरा कर भी पाए तो अल्पमत में रहते हुये जबरदस्ती कार्यकाल पूरा करने वाले संघ के पहले अध्यक्ष बन जाएंगे।

खिलाफत का आंकड़ा दस गुना अधिक

संघ के वर्तमान पदाधिकारियों को हटाने लामबंद हो चुके सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पर 171 हस्ताक्षर कर यह बता दिया कि वो सभी वर्तमान पदाधिकारियों की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है। इसके बाद संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में एक ऐप के माध्यम से चुनाव कराए जाने और न कराए जाने के पक्ष में गुप्त मतदान किया गया, जिसमें 100 सदस्यों ने चुनाव कराए जाने के पक्ष में अपना मत दिया,वहीं सिर्फ 10 सदस्यों ने ही चुनाव न किए जाने के पक्ष में अपना मत दिया। लेकिन महज कुछ घंटे के बाद ही संघ के उपाध्यक्ष रामू पिंचा द्वारा जनमत कों अपने खिलाफ जाता देख उस वोटिंग ऐप को ही डिलीट कर दिया गया,जिससे संघ के सदस्यों में नाराजगी और भी ज्यादा बढ़ गई।

ट्रांसपोर्टर-पदाधिकारियों में मधुर संबंध चिंता का विषय

घी और शहद की तासीर विपरीत होती है। ऐसे में इन दोनों का साथ में प्रयोग जहर का काम करता है। इसी तरह ट्रांसपोर्टर और मालक परिवहन संघ के पदाधिकारियों का हित भी विपरीत है।ऐसे में इन दोनों की बढ़ती नजदीकियां संघ के सदस्यों के लिए चिंता का विषय है। पिछले अध्यक्षों के कार्यकाल के दौरान देखने में आया कि संघ की गाड़ियों को अधिक से अधिक लोडिंग दिलाने में पदाधिकारियों ने काफी मेहनत की। वहीं विक्रम बैस के सचिव रहते संघ के सदस्य पूरी रात गढ़बेंगाल चौक में बारी-बारी से बैठकर ट्रांसपोर्टर की गाड़ी को तब तक रोके रखते थे,जब तक संघ की ट्रकों को लोड ना मिल जाए,लेकिन वर्तमान पदाधिकारियों का ट्रांसपोर्टर से मधुर संबंध संघ के सदस्यों को खटकना लाजमी है। काफी लंबे समय से इन दोनों पक्ष के बीच खिंचतान देखने को नहीं मिला है। उड़ती खबर है,कि बिना विरोध बाहरी ट्रकों की लोडिंग पर संघ के पदाधिकारियों को ट्रांसपोर्टर से एक हजार रूपये प्रति ट्रक मिलता है। बारिश के मौसम को छोड़ दे तो बाकी के महीनों में प्रतिदिन ट्रांसपोर्टर की कम से कम 100 से अधिक गाड़ियां लोड होती है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो यही एक बड़ा कारण है,जिसके चलते परिवहन संघ के वर्तमान पदाधिकारी किसी भी सूरत में पद छोड़ने को तैयार नहीं है।

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