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तकलीफ़-ए-राह बनी नारायणपुर की सड़कें : धूल, गड्ढे और ट्रकों का आतंक – आम जनता बेहाल नारायणपुर

Aaj Ki Dahaad News

Mon, Jan 12, 2026

आज की दहाड़ न्यूज नारायणपुर जिले की सड़कें इन दिनों जनता के लिए राह नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की गंभीर तकलीफ़ बन चुकी हैं। निर्माणाधीन और गड्ढों से जर्जर सड़कों पर दिन-रात दौड़ते ट्रक–टिप्परों से उड़ते धूल के गुबार ने जिलेवासियों का जीवन दुश्वार कर दिया है। सांस लेना तक मुश्किल हो गया है, वहीं दुर्घटनाओं का खतरा हर पल बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिला प्रशासन और माइनिंग कंपनियों को क्षेत्रवासियों की सेहत से कोई सरोकार नहीं है। उनका पूरा ध्यान केवल अधिक से अधिक मात्रा में लौह अयस्क के परिवहन पर केंद्रित है। न सड़कों की मरम्मत की ठोस पहल, न ही धूल नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई देती है।

सोशल मीडिया से सड़क तक गूंजता आक्रोश

जिले के जागरूक नागरिक सोशल मीडिया के माध्यम से खराब सड़कों को लेकर लगातार नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। वहीं, समय-समय पर विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम और पुतला दहन जैसे तरीकों से विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

विडंबना यह है कि कांग्रेस शासनकाल में सड़क और माइनिंग मुद्दों पर मुखर रहने वाले भाजपा के नेता और कार्यकर्ता वर्तमान में चुप्पी साधे नजर आ रहे हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और विरोध प्रदर्शनों के बीच आम जनता धूल भरी सड़कों पर चलने को मजबूर है।

प्रशासनिक चुप्पी, जनता के अपने जुगाड़

धूल से भरी सड़कों के खिलाफ उठ रही आवाज़ें फिलहाल प्रशासन के कानों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। कहा जाता है कि “बहरों को सुनाने के लिए धमाके की ज़रूरत होती है”, लेकिन नारायणपुर की जनता ने टकराव का रास्ता छोड़कर मौन रहकर सब कुछ सहने का विकल्प चुन लिया है। धूल से बचने के लिए लोगों ने अपने-अपने जुगाड़ इजाद कर लिए हैं। माइनिंग मार्गों पर मोटरसाइकिल से चलने वाले ग्रामीण रेनकोट और हेलमेट पहनकर सफर करते नजर आते हैं, जो किसी अंतरिक्ष यात्री के पहनावे से कम नहीं लगते। सच तो यह है कि इन दिनों अबूझमाड़ की सड़कों पर सफर करना अंतरिक्ष यात्रा से कम जोखिम भरा नहीं है।

ट्रांसपोर्ट नगर के अभाव में ट्रकों का जमावड़ा

जिले में ट्रांसपोर्ट नगर की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मुख्य सड़कों पर भारी वाहनों का जमावड़ा बना रहता है।

वर्तमान में समिति, परिवहन संघ और ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 500 ट्रक और 250 टिप्पर लौह अयस्क का परिवहन किया जा रहा है।परिवहन संघ के सदस्यों द्वारा काफी लंबे समय से ट्रांसपोर्ट नगर की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। परिणामस्वरूप, शहर की सड़कों के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े ट्रक आम दृश्य बन चुके हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

आखिर जनता को कब मिलेगी इस समस्या से निजात?

नारायणपुर–कोंडागांव मार्ग, नारायणपुर–ओरछा मार्ग और नारायणपुर–अंतागढ़ मार्ग—इन सभी सड़कों की स्थिति इन दिनों बद से बदतर बनी हुई है। हालांकि बरसात के बाद नारायणपुर–कोंडागांव और नारायणपुर–अंतागढ़ मार्ग पर सड़क निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा और जिलेवासियों के लिए तकलीफ़-ए-राह बनी ये सड़कें एक दिन सुकून-ए-राह बन सकेंगी।

Tags :

छत्तीसगढ़,बस्तर,नेशनल मार्ग, नारायणपुर,

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