अपनी भूख मिटाने बच्चे रसोइया बनने को मजबूर : बालक आश्रम बेडमा में अधीक्षक और कर्मचारी लंबे समय से अनुपस्थित
Aaj Ki Dahaad News
Sun, Jan 18, 2026
नारायणपुर- जिले के विकासखंड ओरछा स्थित बालक आश्रम बेडमा में बच्चों के साथ हो रही गंभीर लापरवाही अब कानूनी अपराध का रूप ले चुकी है।मिली जानकारी के अनुसार आश्रम के बच्चे अपनी भूख मिटाने खुद खाना बनाकर खाने को मजबूर हैं,जबकि आश्रम संचालन के लिए नियुक्त अधीक्षक एवं कर्मचारी लंबे समय से अनुपस्थित हैं। यह कृत्य किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75(बालक के साथ क्रूरता),धारा 76 (बालक की उपेक्षा) भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन व गरिमा का अधिकार),छत्तीसगढ़ आश्रम/छात्रावास संचालन नियमावली का सीधा उल्लंघन है। साथ ही यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 166A (लोक सेवक द्वारा कर्तव्य में जानबूझकर लापरवाही) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।नाबालिग बच्चों से इस प्रकार का कार्य कराना उनके जीवन व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। जिला प्रशासन की चुप्पी इस लापरवाही को संरक्षण देने जैसा प्रतीत होती है।
आम आदमी पार्टी के लोकसभा अध्यक्ष नरेंद्र नाग ने कहा कि दोषी अधीक्षक एवं कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन की कार्यवाही हो व आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। साथ ही मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को कठोर दंड दिया जाए।बच्चों के लिए तत्काल रसोइया,नियमित भोजन व देखरेख सुनिश्चित की जाए।यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आम आदमी पार्टी इस विषय को एससी आयोग,बाल संरक्षण आयोग एवं न्यायालय तक ले जाएगी और जन आंदोलन करेगी।
जाँच के बाद दोषियों पर होगी कार्यवाही- सहायक आयुक्त
आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त राजेंद्र सिंह ने मिडिया से चर्चा में कहा की आपके माध्यम से बालक आश्रम बेडमा के बारे में जानकारी मिली है। इस मामले की जाँच की जाएगी और जाँच में दोषी पाए जाने पर जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जाएगी।
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छत्तीसगढ़,अबूझमाड़, शिक्षा विभाग, नारायणपुर,
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