अविश्वास प्रस्ताव पर रार : सत्ता और संगठन आमने-सामने
छीना-झपटी में पिंकी के हाथ आये 8 वोट,8-6 से जीती बाजी
नारायणपुर- जनपद सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव की सूचना पर कलेक्टर द्वारा अभयजीत मंडावी अनुविभागीय अधिकारी (रा.) को पीठासीन अधिकारी नियुक्त कर जनपद पंचायत नारायणपुर के सभा कक्ष में 18 मार्च को सम्मिलन की तारीख तय की गई थी। अविश्वास प्रस्ताव आवेदन के बाद से भूमिगत हुए सभी जनपद सदस्य वाहनों में सवार होकर जनपद पंचायत पहुंच रहे थे,लेकिन नाटकीय घटनाक्रम में जनपद पंचायत के सामने पहले से ही उपस्थित भाजपा संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को रोक लिया,साथ ही बहसबाजी और झूमा-झटकी करते हुए काफिले के एक वाहन में से दो जनपद सदस्यों रमोली शोरी और एशबती मांझी को उठाकर अपने साथ ले गए।
विरोधी तेवर से उड़े सत्ताधारियों के होश
जनपद अध्यक्ष के खिलाफ आये अविश्वास प्रस्ताव पर जिला-जनपद पंचायत के सभी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित नगर पालिका के उपाध्यक्ष के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी। देश और प्रदेश सहित त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में बाजी मारने वाली भाजपा के सत्ताधारी नेता इस वक्त अपने ही दल के विरोधाभासी तेवरों से काफी परेशान नजर आ रहे हैं। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में जीत के महज एक साल बाद ही पद जाने का भय अब इन्हें सताने लगा है।
पुलिस के सामने दो जनपद सदस्यों को घसीट कर ले गए भाजपाई
नारायणपुर जनपद पंचायत कार्यालय के सामने खड़ी पुलिस भाजपाइयों के आगे लाचार और बेबस नजर आ रही थी। पुलिस की उपस्थिति में भाजपा संगठन के नेता दो जनपद सदस्यों को उठाकर ले गए। देखा जाए तो यह सामान्य सी बात है,लेकिन सोचा जाए तो बहुत कुछ। मंत्री का दबाव पुलिस पर साफ दिख रहा था। छीना- झपटी के वायरल वीडियो में जिला- पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष नारायण मरकाम सहित अन्य भाजपाई मातृशक्ति का खुलेआम अपमान करते नजर आये।
मंत्री के तिकड़म से बची भाजपा की लाज
अविश्वास प्रस्ताव आवेदन के बाद मिले समय का फायदा उठाते हुए भाजपा ने पार्टी समर्थित जनपद अध्यक्ष के पद को बचाने एड़ी-चोटी कर जोर लगा दिया। इसी बीच मंत्री जी के दबाव के चलते सरकारी तंत्र और पुलिस प्रशासन वर्तमान अध्यक्ष पिंकी उसेंडी के पक्ष में कार्य करने मजबूर दिखा। फिलहाल पिंकी उसेंडी ने अपनी जनपद अध्यक्ष की कुर्सी बचा ली है।
6 के मुकाबले 8 वोट से गिरा अविश्वास प्रस्ताव- पीठासीन
अविश्वास प्रस्ताव के लिए पीठासीन नियुक्त हुए अभयजीत मंडावी ने चर्चा में कहा कि अध्यक्ष पद पर हुई वोटिंग में पिंकी उसेंडी के पक्ष में आठ वोट पड़े,जबकि उनके विरोध में सिर्फ 6 वोट पड़े और एक वोट निरस्त हुआ।अविश्वास प्रस्ताव के द्वारा किसी भी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को पद से हटाने के लिए दो-तिहाई वोटों की जरूरत थीं,जरूरी आंकड़ा जुटाने में विरोधी कामयाब नहीं हो पाए।
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छत्तीसगढ़, बस्तर, नारायणपुर, राजनीती,
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