नारायणपुर भाजपा में 'परिवारवाद’ की दस्तक : कार्यकर्ताओं में छाई मायूसी
मेले में लगे पोस्टरों ने बताया युवा मोर्चा को मिल गया है,नया अध्यक्ष
नारायणपुर- प्रदेश की राजनीति में बात चाहे कांग्रेस-भाजपा की हो या अन्य किसी राजनीतिक दल की, जब भी इनमें नई नियुक्तियां होती है, तो दो ही चीज देखने को मिलती है,पहला खुशी की लहर और दूसरा नियुक्ति का खुला विरोध,लेकिन पिछले दिनों युवा मोर्चा में अध्यक्ष पद पर हुई नई नियुक्ति ने नारायणपुर भाजपा में पूरी तरह से सन्नाटा परोस दिया। 29 जनवरी को प्रदेश भाजपा कार्यालय से जारी आदेश के बाद जिले में युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने न फटाके फोड़े, न कोई शोर शराबा किया,न सोशल मीडिया में बधाइयों की झड़ी दिखी, न किसी अखबार-पोर्टल में खबर और विज्ञापन और न ही कोई विरोध, वो तो मावली मेला में पहले दिन लगे पोस्टरों ने क्षेत्र की जनता को बता दिया की 13 दिन पहले ही युवा मोर्चा को अपना नया अध्यक्ष मिल चुका है।जब भाजपाइयों के इस चुप्पी की वजह जानने के लिए परतें कुरेदी गई,तो परिवारवाद की बात सामने आई। बता दें वर्तमान में जिला स्तर पर भाजपा की राजनीति में एक ही परिवार का दबदबा नजर आता है। मंत्री केदार कश्यप के सबसे करीबी संदीप झा पूर्व में युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य थे और वर्तमान में जिला महामंत्री के पद पर आसीन हैं। उनकी पत्नी 2014 में हुये नगरीय निकाय चुनाव में कार्यकर्ताओं की पहली पसंद न होने के बाद भी भाजपा की प्रत्याशी बनाई गई और गुटबाजी के चलते चुनाव हार गई, लेकिन वर्तमान में वो पार्षद होने के साथ ही महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। संदीप झा के छोटे भाई भी वर्ष 2015-2019 में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और अब संदीप झा के साले साहब परमानंद नाग ऊर्फ नानू को युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा हमेशा से ही परिवारवाद की कट्टर विरोधी रही है। ऐसे में जिले में हुई परिवारवाद वाली राजनीति ने युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को इस कदर तोड़ कर रख दिया की उन्हें समझ ही नहीं आ रहा की वो बेचारे क्या करें और वो भी तब जब इस परिवारवाद वाली नियुक्ति पर मंत्री जी का पूरा समर्थन है। अब मंत्री जी के समर्थन के बाद युवा मोर्चा के कार्यकर्त्ता वायलेंट नहीं हो सकते ऐसे में उन्होंने साइलेंट होना ही बेहतर समझा।
दावेदारों और कार्यकर्ताओं में छाई मायूसी
भाजपाइयों में हमेशा से ही बात का गुरुर रहा है कि भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है, जहाँ काम को प्राथमिकता दी जाती है,नाम को नहीं,लेकिन नारायणपुर में हुई नियुक्ति ने दावेदारों और कार्यकर्ताओं के इस गुरुर को तोड़कर रख दिया है। नारायणपुर युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष के पद पर परमानंद नाग उर्फ नानू की नियुक्ति से इस पद के अन्य दावेदारों और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई। राष्ट्रीय स्तर पर तो नहीं लेकिन जिला स्तर पर आने वाले दिनों में किसी राजनीतिक डिबेट के दौरान जब भाजपाई गांधी परिवार और कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाएंगे तो स्थानीय कांग्रेसी इस नियुक्ति का उदाहरण देकर उन्हें चुप कराने में कामयाब होंगे।
साहब ये 'नानू टैक्स' वाला नानू नहीं
कांग्रेस के शासनकाल के दौरान जिले में एक शब्द 'नानू टैक्स' काफी प्रचलन में था,जिसे सुनकर जिले के अधिकारियों की धड़कनें तेज हो जाती थी। लेकिन यह वह नानू नहीं बल्कि भारतीय जनता युवा मोर्चा के सामान्य कार्यकर्ता हैं।

पोस्टरवार की लड़ाई में पहली बार कांग्रेस गायब
पिछले डेढ़- दो दशक से मावली मेला के पोस्टर वार में हर बार कांग्रेस काफी आगे नजर आती थी,लेकिन पहली बार नजारा एक पक्षीय नजर आया। इस बार तो पोस्टर वार है ही नहीं,बल्कि भाजपा का एक छत्र राज है। केंद्र और राज्य में बीजेपी का राज होने के बाद भी नगर पंचायत और पालिका में हमेशा से ही कांग्रेस का राज रहा, पहली बार ये सीट भी कांग्रेस ने गँवा दिया,ऐसे में जिले में सत्ता का कोई भी पद फिलहाल कांग्रेस के पास नहीं है। ऐसे में कांग्रेसियों को पोस्टरों में पदनाम के आगे पूर्व ही लिखना पड़ता। ये भी एक कारण हो सकता है,की कांग्रेस पोस्टरवार में नजर नहीं आ रही। इसके अलावा युवा कांग्रेस और एनएसयूआई में भी वो पहले वाली बात नहीं रही।

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