सिर्फ एक बैंक के सहारे अबूझमाड़ की राजधानी : ऑफलाइन के जमाने से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन तक सिर्फ ग्रामीण बैंक का साथ
Aaj Ki Dahaad News
Mon, Feb 2, 2026
आज की दहाड़
नारायणपुर- अबूझमाड़ ओरछा के रहवासी पिछले पांच दशक से अपने वित्तीय लेनदेन के लिए सिर्फ ग्रामीण बैंक पर निर्भर रहे हैं। नक्सलवाद,बिजली, सडक और नेटवर्क की समस्या सहित और भी ऐसे बहुत से कारण है,जिसके चलते अन्य कोई भी बैंक ओरछा में अपना ब्रांच डालने को कभी भी तैयार नहीं हुई। प्रारंभ से लेकर अब तक अबूझमाड़ ओरछा के सैकड़ों गांव के ग्रामीण अपनी सभी जरूरतें पूरी करने के लिए ओरछा बाजार पर ही निर्भर रहे हैं। इनमें से बहुत से ऐसे गांव हैं,जहाँ के ग्रामीणों को ओरछा तक आने के लिए पगडंडियों से गुजरकर नदी-पहाड़ पार करते हुए लगभग 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति तब और भी भयावह हो जाती है,जब पहाड़ी नाले उन गांवों को टापू में तब्दील कर देते हैं। अपनी आय के लिए कृषि और वनोपज संग्रहण पर पूरी तरह से आश्रित ग्रामीण अपनी आमदनी का एक तिहाई हिस्सा बैंक में जमा रखते हैं। बैंक में ग्रामीणों की भीड़ सिर्फ बाजार वाले दिन ही नजर आती है,जबकि ओरछा में निवासरत कर्मचारी आए दिन नेटवर्क और बिजली के अभाव में बैंकिंग सुविधा के लिए तरसते देखे जाते हैं। मजबूरी में कई बार इन कर्मचारियों को एटीएम से पैसे निकालने के लिए धौडाई तक 32 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
केवाईसी और खाता होल्ड बड़ी समस्या
प्रधानमंत्री आवास की राशि ग्रामीणों के खाते में आने के बाद केवाईसी अपडेट और खाता होल्ड एक बड़ी समस्या बनती नजर आ रही है। अनपढ़ ग्रामीणों के लिए ये किसी कॉम्पीटिशन एग्जाम पास करने से कम कठिन नहीं है। ऐसे में ग्रामीण अपने आवास के नींव निर्माण के बाद खाता होल्ड हटाने के लिए ग्रामीण बैंक के ब्रांच ओरछा में काम ना होने पर जिला मुख्यालय में स्थित मुख्य शाखा आने को मजबूर हैं।
कलम पर भारी अंगूठे का निशान
अबूझमाड़ में आज भी कलम पर अंगूठे का निशान भारी है। इसका कारण यहाँ की एक तिहाई आबादी का अशिक्षित होना है। बैंक में टेबल से बँधी कलम की रिफिल अक्सर भरी की भरी रह जाती है,क्योंकि यहाँ स्टाम्प पेड की स्याही एक दिन में कई बार सुख जाती है। ये तस्वीर तब तक जैसी की वैसी ही नजर आएगी,जब तक अबूझमाड़ की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा शिक्षित ना हो जाये।
नक्सली खात्मे का दावा-डिजिटल इंडिया में आखिर कब बनेगा डिजिटल अबूझमाड़
सरकार एक ओर जहाँ डिजिटल इंडिया का नारा बुलंद करने में लगी है,वहीं सरकार के नक्सली खात्मे के दावे के बीच जिला मुख्यालय से महज 67 किलोमीटर दूर स्थित ओरछा के रहवासी अब तक एक एटीएम को मोहताज हैं। ओरछा में बमुश्किल बीएसएनएल का नेटवर्क काम करता है। ओरछा से 3 किमी दूर जिओ का टावर लगे काफी वक्त बीत चूका है, लेकिन अब भी समस्या जस की तस बनी हुई है। वैसे नक्सली समस्या की समाप्ति के बाद अब वो दिन दूर नहीं जब अबूझमाड़ में भी जिओ की घंटी सुनाई देगी और ग्रामीण लाइन लगाकर एटीएम से पैसे निकालते देखे जायेंगे। फिलहाल अबूझमाड़ में नक्सली गोलियों की गूंज अब पूरी तरह से चुप्पी में तब्दील हो चुकी है,लेकिन जनता को उनके हिस्से की मुलभुत सुविधाओं के साथ डिजिटल लाभ लेने थोड़ा और इंतजार करना होगा।
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