छः दिन से परिवहन कार्य ठप, मालिक-ड्राइवर परेशान : न शिक्षा,न स्वास्थ्य और न ही उड़ते धूल की बात आंदोलन की एक ही मांग 100 रूपये ज्यादा रोजी
Aaj Ki Dahaad News
Mon, Feb 9, 2026
नारायणपुर- जिले के आमदई खदान में पिछले छः दिनों से लौह अयस्क खनन और परिवहन का कार्य पूरी तरह से ठप है। इसका कारण स्थानीय मजदूरों द्वारा अपनी दिहाड़ी में 100 रुपये के इजाफे की मांग है। अपनी मांग को मजदूर संघ के पदाधिकारी और सदस्य जायज बता रहे हैं, जबकि निको प्रबंधन का कहना है कि उनकी यह मांग पूरी तरह से नाजायज है। देखा जाये तो मजदूरों को मिलने वाली राशि कम नहीं है, लेकिन उनकी मांगों में कुछ कमी जरूर नजर आ रही है।मजदूरों की अपनी इस निजी स्वार्थ की मांग के साथ निको कंपनी से अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए अच्छा स्कूल, ग्रामीणों के लिए अच्छा अस्पताल और क्षेत्र की हरियाली के लिए पेड़ लगाने जैसे मांगों को भी सम्मिलित करना था,जिससे जिलेवासी भी उनके इस मांग का समर्थन करने कदम से कदम मिलाते।
बमुश्किल पटरी पर लौटी थी, ट्रक और अब आया बेमौसमी हड़ताल का तूफान
आमदई खदान से कच्चा माल लेकर नारायणपुर होते हुए कोंडागांव तक खराब सड़कों पर दौड़ती ट्रकों के सेंटर बोल्ट,यू बोल्ट और पट्टा टूटना जैसे आम बात हो गई है। वर्ष 2025 में दिवाली तक बरसात की मार झेलने वाले ट्रक मालिकों और ड्राइवरों की स्थिति पहले ही दयनीय थी। पिछले एक-दो महीने से ही ट्रक किसी तरह पटरी पर लौटी ही थी की अब बेमौसमी हड़ताल इनकी आर्थिक स्थिति बिगाड़ने में तुला हुआ है।
खराब सड़क,बारिश और अब हड़ताल,किस्त तो टूटेगा साहेब
बरसात के मौसम में प्रतिमाह तीन से चार ट्रिप कच्चे माल का परिवहन कर और खराब सड़कों पर अपनी ट्रकों को दौड़ाकर पहले ही पार्ट्स दुकानों के संचालक और गैरेज मिस्रियों के कर्ज तले दबे ट्रक मालिकों के लिए इस माह भी गाड़ियों का किस्त भरना आसान नजर नहीं आ रहा है। जिले के 80% ट्रक मालिकों का सिविल स्कोर उस न्यूनतम स्थिति में है,की इन दिनों उन्हें कंज्यूमर फाइनेंस मिलना भी मुनासिब नहीं है।
जिलेवासियों की मानसिकता और मकसद ही तय करेंगी जिले का प्राकृतिक भविष्य
जिले के प्रायः सभी सड़कों में बड़े- बड़े गड्ढे और उड़ते हुये धूल से होने वाले स्वास्थ्य हानि पर स्थानीय ग्रामीण मौन है। अब उन्हें अच्छे स्कूल,अच्छे अस्पताल,अच्छी सड़कें और हरियाली की चिंता न होकर अपने प्रतिदिन की आय बढ़ाने पर ज्यादा रूचि है।इन दिनों उनका सारा प्रयास भी इसी मकसद के इर्द-गिर्द ही घूमता नजर आ रहा है। नारायणपुर एक आदिवासी बहुल जिला है और आदिवासी प्रकृति पूजक होते हैं। आमदई के पहाड़ों में आंदोलन पर बैठे अधिकतर युवा आदिवासी हैं और उनके अपनी निजी स्वार्थ के मांगों ने प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरण चिंतकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आने वाले दिनों में जिले का प्राकृतिक भविष्य क्या होगा।
गोदी खोदने पर भी नहीं मिलती इतनी दिहाड़ी
मनरेगा योजना में गोदी खोदने वाले मजदूरों को प्रतिदिन 261 रुपये दिहाड़ी दी जाती है,जबकि निको प्रबंधन द्वारा आमदई खदान में कार्यरत 425 अकुशल मजदूरों को 541 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी प्रदान की जाती है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आमदई खदान में कार्यरत और कुशल मजदूर सड़क पर दिन भर खड़े नजर आते हैं इनके पास कोई काम नहीं होता इसके बावजूद इन्हे 541 रुपए की दिहाड़ी कम लगती है।
गैर कानूनी मांगों पर कब चलेगी पुलिसिया लाठी
निको प्रबंधन के खिलाफ जब भी कोई आवाज उठी,या तो उसे पहले ही दिन बातचीत के माध्यम से सुलझा लिया गया या फिर दो-तीन दिनों में पुलिस के डंडे दिखाकर समाप्त कर दिया गया। परिवहन संघ के द्वारा जब भी अपनी कीमतों में इजाफा करने या अन्य मांगो को लेकर माइंस की गाड़ियां रोकी गई,तब पुलिस और प्रशासन तुरंत ही एक्टिव मोड़ में नजर आये। निको प्रबंधन और प्रशासन राजस्व नुकसान की बात करते हुये अपने खिलाफ उठने वाले आवाज को रोकने में जरा भी देरी नहीं करता। लेकिन पिछले छः दिनों से स्थानीय मजदूरों द्वारा खनन और परिवहन का कार्य पूरी तरह से बाधित करने के बाद भी प्रशासन अब तक मौन है। ऐसे में देखना होगा आंदोलनकारियों पर पुलिसिया लाठी कब बरसेगी।
हमारी मांग अकुशल से अर्धकुशल मजदूर में सही वर्गीकरण
मजदूर संघ के अध्यक्ष अंतु कोर्राम ने कहा की हमारे मजदूर इलेक्ट्रिकल,मैकेनिकल,सिविल, डिस्पैच और माइनिंग जैसे तकनीकी कार्य पिछले 3-4 साल से कर रहे हैं।इतने लंबे समय से काम करने वाले मजदूरों को अकुशल कहना गलत और अन्यायपूर्ण है।हम सिर्फ अपना हक और सही वर्गीकरण मांग रहे हैं।
ट्रक लोडिंग से वंचित,किस्त पटाना बड़ी चुनौती
मालक परिवहन संघ के अध्यक्ष किशोर आर्य ने कहा कि मजदूर संघ के हड़ताल के दौरान हमारे सभी ट्रकों की लोडिंग बंद होने से संघ के सभी सदस्यों के लिए किस्त पटाना एक बड़ी चुनौती है। बंद के दौरान ट्रक ड्राइवर अपने घर लौट गए हैं। परिवहन संघ में चलने वाले ट्रकों के अधिकतर ड्राइवर अन्य शहरों और राज्यों के हैं, ऐसे में लोडिंग कार्य प्रारंभ होने के बाद भी हमें अपनी गाड़ियों को लोडिंग पॉइंट में भेजने में कम से कम तीन-चार दिन का वक्त और लग जाएगा।
निको ने 18 रूपये बढ़ाया,मजदूरों से कार्य में लौटने की अपील
कंपनी में मानव संसाधन विभाग के प्रमुख दशरथी बुधिया ने कहा की माइंस प्रबंधन द्वारा श्रमिकों को केंद्र सरकार के न्यूनतम वेतन अधिसूचना के अनुसार प्रत्येक 6 माह में बढ़ा हुआ वेतन नियमित रूप से दिया जा रहा है। साथ ही पीएफ, बीमा, सुरक्षा मानकों एवं अन्य सभी श्रम कानूनों का पूर्ण पालन किया जा रहा है। इसके बाद भी कंपनी ने सद्भावना दिखाते हुए न्यूनतम वेतन के अतिरिक्त 18 रूपये प्रतिदिन प्रति श्रमिक देने का प्रस्ताव भी रखा है।इसके बावजूद बीते 6 दिनों से हड़ताल के कारण संपूर्ण माइनिंग गतिविधियां बंद हैं, जिससे कंपनी के साथ-साथ ट्रक चालक,परिवहन कर्मी एवं हजारों परिवारों की रोजी -रोटी प्रभावित हो रही है।प्रबंधन बातचीत के माध्यम से शीघ्र समाधान चाहता है और श्रमिक साथियों से अपील करता है कि वे व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए कार्य पर लौटें।
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