बगावत : जनपद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
Mon, Mar 16, 2026
अहंकार पर भारी अविश्वास
नारायणपुर
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम आने के एक साल बाद जिले में अविश्वास प्रस्ताव के बादल उमड़ते दिखाई दे रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत नारायणपुर की अध्यक्ष पिंकी
उसेंडी के विरुद्ध अन्य जनपद सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन कलेक्टर को सौंपा है। सभी जनपद सदस्य वर्तमान अध्यक्ष पिंकी उसेंडी के व्यवहार से काफी आहत नजर आ रहे हैं। उनका आरोप है,कि अध्यक्ष बिना किसी से सलाह-मशविरा किये अपने मनमर्जी से काम करती है। इसलिए वो सभी अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से नया अध्यक्ष चुनना चाहते
हैं
। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये अविश्वास प्रस्ताव के घने बादल गरज-चमक के साथ बरसते हैं या वनमंत्री और स्थानीय विधायक महोदय के दबाव में आकर छट जाते हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष- उपाध्यक्ष पद पर भी खतरे की घंटी
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो जनपद अध्यक्ष के खिलाफ आया ये अविश्वास प्रस्ताव फिलहाल रुकने का नाम नहीं लेगा। अगली कड़ी में नारायणपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के विरुद्ध भी जल्द ही अविश्वास प्रस्ताव देखने को मिल सकता है। जिला पंचायत के अन्य सभी सदस्य वर्तमान अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कार्यशैली से काफी नाराज बताए जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है,कि अपने पद का धौंस दिखाकर ये दोनों जिले के किसी भी ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाकर सारे निर्माण कार्य स्वयं करने के साथ ही अपने खास लोगों को भी दिलवा रहे हैं।
निर्वाचन प्रमाण-पत्र कहीं ठेकेदारी का लाइसेंस तो नहीं
जिला-जनपद पंचायत के सदस्य क्षेत्र के चुने हुए जनप्रतिनिधि होते हैं,जिनका मुख्य कार्य क्षेत्र के विकास कार्यों की निगरानी और जनहित के मुद्दों को आगे बढ़ना होता है। साथ ही क्षेत्रवासियों के हितों को ध्यान में रखकर निर्माण कार्यों को स्वीकृत करवाना होता है,लेकिन बीते कुछ वर्षों में जिला-जनपद के सदस्य जनप्रतिनिधि कम ठेकेदार ज्यादा नजर आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ नजारा नारायणपुर जिले में भी देखने को मिल रहा है।
18 की तिथि नियत- एसडीएम
नारायणपुर के अनुविभागीय अधिकारी अभयजीत मंडावी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि जनपद सदस्यों द्वारा लाये गए अविश्वास प्रस्ताव पर विचार किए जाने के प्रयोजन से 18 मार्च पूर्वहान 11:00 बजे जनपद पंचायत नारायणपुर के सभा कक्ष में सम्मिलन की कार्यवाही नियत की गई है।
वार्डवासियों की मांग : पाथवे निर्माण से पहले हो जलभराव की समस्या का निदान
Thu, Mar 12, 2026
शहर की दिशाहीन ड्रेनेज सिस्टम पर उठ रहे सवाल
नारायणपुर
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इन दिनों नारायणपुर नगर पालिका शहर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए प्राण-प्रण से कार्य करती नजर आ रही है,इसी कड़ी में बंधुआ तालाब को खूबसूरत बनाने के लिए नगर पालिका द्वारा पूर्व में तालाब के चारों ओर आरसीसी वॉल का निर्माण किया गया और अब पाथवे का निर्माण किया जा रहा है। बंधुआ तालाब से सटे वार्ड के रहवासियों का कहना है कि इस पाथवे निर्माण से पहले जल भराव की समस्या का निदान किया जाना चाहिए,क्योंकि इस निर्माण के बाद इस समस्या का निदान असंभव हो जाएगा। बरसात आने में अभी काफी समय है,ऐसे में काबिल आर्किटेक्ट और इंजीनियरों से ड्राइंग व लेआउट करवा कर नालियों का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे वार्ड वासियों को इस समस्या से राहत मिल सके। तालाब से सटे कुछ मकानों के पास चारों ओर नालियां हैं, इसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे पता चलता है कि नगर पालिका द्वारा ड्रेनेज सिस्टम को ध्यान में रखकर नालियों का निर्माण नहीं करवाया गया।
शहर में बहती है,उल्टी-गंगा
वर्तमान का नारायणपुर शहर प्रारंभ से वर्ष 2003 तक ग्रामीण क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। वर्ष 2004 में इसे नगर पंचायत घोषित किया गया और धीरे-धीरे हुई शहरीकरण ने इसे आखिरकार 2014 में नगर पालिका बना दिया। ग्राम पंचायत से नगर पालिका तक का सफर तय करने वाले इस शहर ने धीरे-धीरे विकास तो किया,लेकिन एक विडंबना यह रही कि शहर के नालों और नालियों का ड्रेनेज सिस्टम कभी भी संतोषजनक नहीं रहा। शहर के सभी 15 वार्डों में नालियों का निर्माण तो खूब हुआ,लेकिन उल्टी गंगा बहाने के तर्ज पर हुआ।
बंधुआ तालाब है,शहर का केंद्र बिंदु
शहर के हृदय स्थल पर स्थित बंधुआ तालाब हमेशा से शहर का केंद्र बिंदु रहा है। इसी तालाब को केंद्र बिंदु मानकर हमेशा से ही शहर की नालियों का निर्माण किया गया, लेकिन ठेकेदारों और इंजीनियरों ने कभी भी ढाल की दिशा का ध्यान नहीं रखा, जिसके चलते शहरवासी हमेशा से परेशान रहे हैं। बरसात को छोड़ दें तो अन्य 8 महीनों में नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों द्वारा नालियों की सफाई कर शहर वासियों को राहत दी जाती रही है, लेकिन बरसात के दिनों में ड्रेनेज सिस्टम की गलत व्यवस्था के चलते शहर के अधिकतर वार्डों में जल भराव की समस्या देखने को मिलती है।
हमला बस सही नाली चाही,बात खत्म-वार्डवासी
बीते कई वर्षों से बरसात के दिनों में तीन-चार फीट जल भराव की समस्या झेल रहे वार्डवासियों की जिद भरी मांग है, कि हमको बस सही दिशा में बहने वाली नाली चाहिए,जिससे हमें जल भराव की समस्या से राहत मिल सके।
समस्या का होगा समाधान- सीएमओ
नगर पालिका नारायणपुर के नवनियुक्त प्रभारी सीएमओ रामचंद्र यादव ने कहा कि वार्ड वासियों की समस्या को ध्यान में रखकर हमने क्षेत्र का निरीक्षण किया और इंजीनियर को वाटर लेवल के हिसाब से एस्टीमेट बनाने के लिए निर्देशित किया है। वार्डवासियों को जल भराव की समस्या से राहत दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जल्द ही उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा।
खबर का असर : नियुक्ति के 20 दिन बाद हुआ जिलाध्यक्ष का स्वागत
Fri, Feb 20, 2026
सीनियर नेताओं की फटकार के बाद फूटे फटाके
नारायणपुर
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29 जनवरी को हुई युवा मोर्चा जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के 20 दिन बाद आखिर नारायणपुर जिले के घोषित जिलाध्यक्ष परमानंद नाग ऊर्फ नानू के स्वागत में युवा मोर्चा के सदस्यों को नारे लगाने और फटाके फोड़ने पर मजबूर होना ही पड़ा। सूत्र बताते हैं,अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को सीनियर नेताओं से फटकार मिली, जिसके बाद उन्होंने देर से ही सही पर अध्यक्ष का स्वागत करने का फैसला किया। दरअसल ये दहाड़ न्यूज की खबर का असर ही था,की युवा मोर्चा के नये जिलाध्यक्ष का स्वागत भी हुआ,फटाके भी फोड़े गए और जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। बता दें "नानू" नाम नारायणपुर जिले में बीते 7 वर्षों से काफी प्रचलन में रहने के चलते इन दिनों "नानू भैया जिंदाबाद" का नारा मिर्जापुर वेब सीरीज के "मुन्ना भैया जिंदाबाद" के नारे से कम भी सुनाई नहीं देता।
बहुत देर कर दी मेहरबाँ आते -आते
प्रायः देखा जाता है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी में जब भी कोई नेता महत्वपूर्ण पद लेकर आता है,तो उनके स्वागत में पार्टी के कार्यकर्ता तुरंत ही सोशल मीडिया पर बधाइयों की झड़ी लगा देते हैं, लेकिन परमानंद नाग ऊर्फ नानू भैया जिले के इतिहास में वो पहले ऐसे नेता होंगे, जिनकी नियुक्ति के 20 दिन बाद उनका स्वागत हुआ,जबकि वो युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष का पद न देश की राजधानी दिल्ली से लेकर लौटे हैं और न ही प्रदेश की राजधानी रायपुर से। उन्हें ये पद घर बैठे ही मिला है,तो ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है,कि शहर से महज 3 किमी की दूरी में रहने वाले जिलाध्यक्ष के स्वागत में युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं और भाजपाइयों को 20 दिन का वक्त कैसे लग गया। मेले में लगे पोस्टरों के तर्ज पर अब नियुक्ति के 20 दिन बाद स्वागत में फूटने वाले फटाकों की गूंज ने बताया कि वो वरिष्ठ नेताओं की फटकार के बाद फूटने पर मजबूर हुये हैं।